पीएम स्वनिधि स्कीम में बैंके और नगर निगम पूरी तरह से पीएम की गाइडलाइन्स का कर रहे उन्लंघन
रेहड़ी-पटरी, ठेले या सड़क किनारे दुकान चलाने वालों के लिए सरकार ने एक लोन स्कीम शुरू की है. इसका नाम पीएम स्वनिधि योजना है. लॉकडाउन के कारण ऐसे दुकानदारों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ा है. इनकी आजीविका पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है. इस स्कीम का मकसद रेहड़ी-पटरी और छोटी दुकान चलाने वालों को सस्ता कर्ज देना है. इस स्कीम को पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि के नाम से भी जानते हैं. पीएम स्वनिधि की ऑफिशियल वेबसाइट https://www.pmsvanidhi.mohua.gov.in/Home/Schemes की स्कीम गाइडलाइंस पर साफ-साफ अवगत कराया गया है कि कि ठेले खोमचे लगाने वालों के साथ छोटे दुकानदारों को भी यह लोन दिया जाए पर अभी तक के काम में सरकारी तंत्र पूरी तरह से केवल ठेले, खोमचे वालों के फॉर्म भरवा रहा है और बैंके भी केवल ठेले वालों को ही लोन दे रही हैं. बैंक और नगर निगम साफ-साफ छोटी मोटी दुकानदारों के सर्टिफिकेट इश्यू करने और लोन देने से मना कर रही है. इस तरह से यह लोग प्रधानमंत्री की गाइडलाइंस का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं और किसी भी छोटी मोटी दुकान चलाने वालों को इसका लाभ बिल्कुल भी नहीं मिल पा रहा है.
पीएम स्वनिधि योजना के तहत अधिकतम 10 हजार रुपये तक का लोन मिलता है. यह कारोबार को शुरू करने में मदद करता है. यह बेहद आसान शर्तों के साथ दिया जाता है. यह एक तरह का अनसिक्योर्ड लोन है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक जून को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को हरी झंडी दी गई. इस योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों को छोटी राशि का कर्ज उपलब्ध कराया जाता है. ऐसा लोन देने में किसी तरह की गारंटी नहीं ली जाती है. सरकार ने स्ट्रीट वेंडरों की मदद की खातिर इस स्कीम के लिए 5000 करोड़ रुपये की राशि रखी है. इसके लिए कोई कड़ी शर्त नहीं होगी.
इस योजना के तहत रियायती दरों पर कर्ज दिया जाता है. समय से कर्ज का भुगतान करने वालों को ब्याज में खास छूट भी दी जाती है.